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Wednesday, July 23, 2014

कोई तो लगन

अनीसा अपने प्यार में कोई तो कसक, कोई तो लगन , कोई तो जादू  है जो दिलों में बहैसियत मौजूद है .

अनीसा  जब तुम अभी 4 जुलाई 01 को मुझे फोन करने आई थी, लेकिन मेरे न मिलने की वजह से मेरी आवाज़ को सुनने में कामयाब न हुयीं.
अनीसा उस वक़्त मैं तहसील सर्टिफिकेट बनवाने गया था.

अनीसा मेरा यक़ीन करो , जब मैं वहां से लौटकर घर आ रहा था, रास्ते में मुझे पता नहीं क्यूँ ऐसा लग रहा था- कि जैसे आज तुम मुझे फोन करोगी और जैसे ही मैं घर आया, मालूम हुआ- तुम्हार फोन आया था. लेकिन शायद उस वक़्त बात करना अपनी किस्मत में नहीं था.

- शाहिद
4.07.01